परिचय :- रक्त भार मापने पर जब 150 से 300 तक उच्च रक्तचाप बढ़ जाता है तब अनेक विकार शरीर में पैदा हो जाते है जो B.P. के सामान्य होते ही अपने आप ही सामान्य हो जाते है रक्तचाप का बढ़ना अपने आप में कोई स्वतंत्र रोग नहीं है बल्कि यह शरीर में पनप रहे अन्य अनेक घातक रोगो का एक परिणाम है जो रोगी को भोगना पड़ता है।

नोट : जिन लोगों को उच्च रक्तचाप का रोग है वे नमक का उपयोग बंद कर दे या उसकी मात्रा कम कर दे, क्योकि नमक रक्त में रक्त के आयतन को बढ़ाता है जिससे दिल को अधिक जोर लगाना पड़ता है जिन लोगों की धमनियां तंग और कठोर हो चुकी है वे नमक के अलावा मांस, घी, दूध, मक्खन, नारियल का तेल, वनस्पति घी, पशुओ की चर्बी भी खाना बंद कर दे। क्योकि चिकनाई धमनियों में जमते रहने से अंदर से कठोर और तंग हो जाती है, इससे धमनियों में कोलेस्ट्रॉल अधिक जम जाती है अत: हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए चिकनाई एक प्रकार से विष के सामान है।

उच्च रक्तचाप के रोगियों का उपयोगी भोजन :-
रोटी, दालें, सप्रेटा दूध, हरी साग-सब्जियां, फल और उनका रस इत्यादि हितकर है, प्रोटीनयुक्त और विटामिन वाले जल्दी पचने वाला भोजन ही खाना लाभदायक है और चाय, शराब, तम्बाकू, सिगरेट और मसालेयुक्त भोजन हानिकारक है । गरिष्ठ यानि जो देर से हजम हो ऐसा भोजन भी अधिक खाना हानिकारक है। रोगी स्वयं को मोटा होने से और वजन बढ़ने से भी बचाये रखे। ऐसे भोजन से भी रोगी को बचना चाहिए जोकी पेट में गैस या मल भी अधिक बनाता हो। ईर्ष्या, द्वेष भाव, गुस्सा और शक्ति से अधिक शारीरिक और मानसिक कार्य से भी बचना चाहिए। नित्य 24 घंटे में से कम से कम 8 घंटे हर रोज गहरी और बे-फिकरी नींद लेनी चाहिए और दोपहर के भोजन के बाद कम से कम आधा आराम करना अत्यंत लाभदायक है

उपचार :-

1. छोटी चन्दन जिसको चंद्रभागा भी कहते है आयुर्वेद में इसे सर्पगंधा और यूनानी में असरोल और एलोपैथी में रोवुल्फ़िया सर्पेंटाइना भी कहते है इस रोग की परम हितकर औषध मानी जाती है।
उच्च रक्तचाप के रोगी को सबसे पहले जुलाब देना हितकर होता है ताकि उसको पतले पाखाने से उसका पेट साफ़ हो जाये। पेट में गैस पैदा होने से, कब्ज रहने और भोजन के अंश सड़ते रहने से इनके विषैले प्रभाव रक्त में मिलकर रक्त के दबाव को बढ़ा देते है। जुलाब देने के बाद रक्त की बढ़ी हुई उत्तेजना और अधिक दबाव कम करने के लिए पिसी हुई छोटी चन्दन 3 रत्ती ( 36 मि.गा.) दिन में तीन बार ताजे पानी या अर्क गुलाब से सेवन कराना चाहिए।
2. मयूर पंख को जलाकर इसकी राख 1 से 2 रत्ती तक शहद में चटाने से दिल की पीड़ा और दमे में आराम होता है, वमन का वेग भी रुक जाता है और उच्च रक्तचाप में भी अत्यंत ही लाभदायक है ॥
3. ह्रदय रोग में दिन में 3-4 बार 2-3 चम्मच शहद का सेवन करना अत्यंत लाभदायक है इस प्रयोग से हार्टफेल का भय भी दूर होता है
4. लहुसन के निरंतर प्रयोग से उच्च रक्तचाप, रक्त वाहिनियों की कठोरता और तंग हो जाना बिलकुल ठीक करता है।
5. B.P. हाई हो या लो, इसमें दुग्धपान से शत-प्रतिशत सफलता मिलती है रोगी दुग्धपान अधिक करे।
6. अदरक को घी में तलकर खाने से दिल की बढ़ी हुई धड़कन में लाभ होता है ।
7. गिलोय और काली मिर्च दोनों को संभाग लेकर कूट पीसकर छानकर हर रोज 3-3 ग्राम जल के साथ सेवन करना दिल की कमजोरी में लाभदायक है।
8. सूखा आँवला और मिश्री 50-50 ग्राम बारीक़ कूट पीसकर कपड़छान करके सुरक्षित रख ले। इसे 6 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ कुछ दिनों तक लगातार सेवन करने से दिल सम्बन्धी सभी रोग दूर हो जाते है
9. रेहां के बीज 10 ग्राम रात में मिटटी के बर्तन में आधा किलो पानी में भिगो दे। रातभर बाहर हवा में पड़ा रहने दे। सुबह मल एवं छानकर थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सेवन करने से केवल एक हफ्ते में ही दिल की दुर्बलता और दिल सम्बन्धी अन्य सभी रोग दूर हो जाते है।
10. अगर का चूर्ण शहद के साथ चाटने से दिल की शक्ति बढ़ती है
11. अर्जुन वृक्ष की छाल 10 ग्राम, गुड़ 10 ग्राम, दूध 500 ग्राम। अर्जुन की छाल का चूर्ण बना ले फिर इस चूर्ण को दूध में डालकर पकाये। पीने योग्य होने पर छानकर और गुड़ मिलाकर रोगी को पिलाने से दिल की सूजन और शिथिलता दूर हो जाती है ।
12. पीपलामूल 1 ग्रेन का चूर्ण शहद के साथ बालकों के दिल का रोग ठीक हो जाता है
13. मेथी के काढ़े में 6 ग्राम में शहद मिलाकर पीने से पुराने से पुराना दिल का रोग ठीक हो जाता है।

                                                                                                                                                                    संदर्भ :- आयु. चिकि. प्रकाश

नोट : उपयोग से पहले चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।

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