दूधआयुर्वेद के अनुसार माँ के दूध के बाद मानव के लिए गाय का दूध, बकरी या भैंस के दूध से अच्छा होता है। सुबह के समय दुहा हुआ दोषयुक्त होता है और शाम को दुहा हुआ दोषों से रहित होता है। इसलिए शाम के समय गाय का दूध दुहने के तुरंत बाद, पाव भर तक पीना सबसे अच्छा होता है। यह शीतल, हल्का, अग्निवर्धक और त्रिदोष नाशक होता है

दुहने के 5-7 मिनट बाद दूध की गर्मी शांत होने के बाद इसको हमेशा उबाल कर ही पीना चाहिए।

उबाला हुआ दूध, धारोष्ण से भारी और कुछ कफ पैदा करने वाला होता है, किन्तु वात और पित्त का नाश करने वाला होता है।

छोटे बच्चे वाली और बिना बच्चे वाली गाय का दूध त्रिदोषकारक होता है।

इसमें आधा पानी डालकर औटा कर पानी सूखा देने से यह हल्का हो जाता है।

पाइया दूध और पाइया पानी में एक पीपल (पिप्पली) डाल कर औटा देने से इसे बच्चे और कमजोर रोगी भी पचा लेते है।

खांड-युक्त दूध वात मिटाता है परन्तु कफ कारक होता है, मिश्री मिला हुआ दूध त्रिदोष नाशक होता है।

पुराना गुड़ मिला हुआ ठंडा दूध मूत्रकृच्छ नाशक होता है, परन्तु पित्त एवं कफ को बहुत बढ़ाता है।

औटा हुआ दूध ठंडा होने पर पित्त को ख़त्म करता है किन्तु वात एवं कफ को बढ़ाता है और कुछ गर्म मिश्री मिला हुआ वात एवं कफ का नाश करता है परन्तु पित्त को बढ़ाता है।
इन कारणों से रात में गर्म दूध अच्छा पथ्य माना जाता है।

सब तरह के भोजन में धयान रखने योग्य बातें :-   जो वस्तुएं वात और कफ को शमन करने वाली होती है, वह पित्त को बढ़ाती है और जो पित्त को ख़त्म करने वाली होती है वह प्रायः वात एवं कफ को बढ़ाने वाली होती है। अतः मौसम, शक्ति और प्रकृति के अनुसार ही भोजन आदि का सेवन करना चाहिए।

भैंस का दूध अधिक चिकना, भारी, मधुर और वीर्यवर्धक होता है परन्तु कफकारक, नींद लाने वाला एवं ठंडा होता है।

बकरी का दूध कषैला, मधुर, शीतल और हल्का होता है। यह बुखार एवं खांसी-श्वास के रोगों में पथ्य है।

भेड़ का दूध पीने योग्य नहीं होता, केवल बाह्य प्रयोगों में उपयोग किया जाता है।

आज के समय में स्वस्थ गाय या बकरी का दूध मिलना बहुत अधिक मुश्किल हो गया है अतः जिन छोटे बच्चों को अपनी माता का दूध पर्याप्त नहीं है

उनके लिए सबसे अच्छी विधि यह है कि उपलब्ध दूध में पानी मिलाकर पतला करके, उसमे 1 पीपल डालकर औटा ले, और बच्चों कि आयु व आवश्यकता के अनुसार देवें

बच्चों के लिए गेंहू के घास (जिसको ज्वारे भी कहते है) का रस भी उपयोगी होता है यह 5 बूँद तक नवजात शिशु को भी दे सकते है।

देसी गाय के दूध का विकल्प :-  आजकल बाजार से अच्छा दूध मिलना कठिन सा हो गया है अतः उसके विकल्प दिए जा रहे है, यह उपलब्ध दूध से सस्ता और उपयोगी भी है

अंकुरित गेंहू से दूध बनाने कि विधि —-   50 ग्राम अंकुरित गेंहू को 11 तुलसी के पत्तों के साथ कुचल, कूट या पीसकर उसमे पावभर (पाइया) उबलता हुआ पानी डालकर मिला दें और छानने पर प्राप्त रस को हलके गर्म दूध की तरह सेवन करें। इसमें मीठा या नमक स्वादानुसार मिलाकर सेवन कर सकते है।

ठण्ड के दिनों में गेंहू के साथ 20 ग्राम मूंगफली और मौसम के अनुसार सौंठ, काली मिर्च एवं पीपल और 20 ग्राम तिल के अंकुर भी कूट पीसकर इसे तैयार कर सकते है।

बादाम से दूध बनाने की विधि —- ठन्डे मौसम में 8-10 घंटे पहले 5-7 बादाम, 5 तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम सौंफ, 2 छुहारे, 1 अखरोट की मींगी और 2 मुनक्के भिगो दी जावें।
अब इसे बनाते समय पहले बादाम के छिलके उतारकर अखरोट की मींग के साथ खूब घोट दें। फिर इसमें तुलसी, छुहारे आदि मिलाकर अच्छी तरह घोट लें।
अब सौंफ को अलग से थोड़ी सौंठ, काली मिर्च और पिप्पली के साथ घोट लें और फिर इसमें 300 ग्राम पानी डालकर उबाल लें।
5 मिनट उबालने के बाद इसमें पहले से तैयार बादाम आदि की घुटी चटनी में छानकर मिला दें और उसे हलके गर्म दूध की तरह पी लें। आवश्यकतानुसार इसमें मीठा मिला लें।

गर्मी के लिए बादाम और अखरोट को घोटते समय उसमे एक छोटी इलायची के दाने डाल देते है और छुहारों का प्रयोग नहीं करते है। सौंफ की जगह धनिये के भीगे दानों की चटनी 300 ग्राम शीतल जल में घोल घुटे बादाम आदि में मिला मीठा मिला कर पीते है। सौंठ और पीपल का उपयोग भी नहीं करते है।

नोट : बादाम का दूध आँखों की रोशनी एवं स्मरण-शक्ति वर्धक, दिल, दिमाग एवं शरीर को बल देने वाला पौष्टिक जलपान है।

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