धनियांपरिचय : – धनियां – इसका पौधा एक या दो फुट ऊँचा, शाखायें चिकनी, पत्ते विषमवर्ती जड़ के समीपवाले, गोलाकार 3-4 या 5 भागों में बँटे हुए, प्रत्येक भाग कटे हुए किनारेवाले होते है।

फूल छत्ते से सोया के फूल के समान सफ़ेद या कभी-कभी गुलाबी झलक युक्त होते है। फल छोटे-छोटे अंडाकार गुच्छों में छत्राकार लगते है। सूखने पर इसके फल दो टुकड़ों में विभाजित हो जाते है इन्ही बीजों या फलों को धनियां कहते है। यह मसाले में पड़ता है, स्वाद फीका और सुगन्धित सा होता है। भारत के सभी राज्यों में इसकी थोड़ी बहुत खेती होती है।

ग्राह्य अंग :- धनिये के बीज या फल ही व्यवहार में आते है। औषधि में इसके फल ही लेने चाहिए। हरा धनियां तो सर्वांग व्यवहार में आता है।
मात्रा : – 2 माशे से 6 माशे तक

अनेक भाषाओँ के नाम :– संस्कृत –धान्यक।, हिंदी –धनियां, धनिआ।, बांग्ला — धने। मराठी — धने, कोथिंबीर। गुजराती — धाना, कोथमीर। अंग्रेजी — corriander seeds। लैटिन — coriandrum satium।

धनिये के गुण :–

धनियां कषाय रसयुक्त चिकना, अवृष्य ( वीर्य नहीं बढ़ाता है ), पेशाब लाने वाला, हल्का, चरपरा और कड़वे रसयुक्त, उष्णवीर्य, अग्निदीपक, पाचक, ज्वरनाशक, रोचक, परिपाक में मधुर रसवाला, त्रिदोषनाशक एवं प्यास, जलन, उल्टी, श्वास, खांसी, कृशता (कमजोर शरीर) और कृमिरोग का नाश करनेवाला है।

कच्चे धनिये (हरे) के गुण भी सूखे धनिये के समान ही होते है किन्तु खास बात यह होती है की वह मधुर रसयुक्त और विशेषतः पित्तनाशक होता है।

धनियां ठंडा, पित्त और कफनाशक होता है। – राजनिघण्टु

यूनानी मतानुसार गुण :–
धनियां दूसरे दर्जे में ठंडा और रुक्ष है। वीर्य को कम करने वाला शीतलता-उत्पादक है। शहद इसका दर्पनाशक है।

काहू के बीज या खसखस इसके प्रतिनिधि ( एक औषधि के ना मिलने पर उसकी जगह उपयोग में लायी जाने वाली दूसरी औषधि) है।

उपयोग :–
धनिये का उपयोग मसालों में किया जाता है। हरे धनिये की चटनी बहुत स्वादिष्ट बनती है। हरे धनिये का बहुत उपयोग किया जाता है इससे सब्जी सुगन्धित और स्वादिष्ट बनती है नीचे कुछ प्रयोग लिखते है।

प्यास में :- ज्वर आदि रोगों में प्यास बहुत लगने पर धनिये को पानी में पीसकर घोलकर शक्कर या शहद मिलाकर पिलाने से प्यास मिट जाती है – वाग्भट चि॰ अ॰ ७

ज्वर के अंतर्दाह में :– धनियां रात को पानी में भिगो दे, सुबह मसलकर छान कर मिश्री और शहद मिलाकर पिलाने से अंतर्दाह मिटता है। – शोड़ल

वातरक्त (यूरिक एसिड) में :– धनियां, सफ़ेद जीरा, और काला जीरा इन सभी को एक-एक तोला लेकर पाक -विधि के अनुसार गुड़ में पकाकर सेवन करने से वातरक्त में लाभ होता है। – हारीत॰ चि॰ अ॰ २४

पित्तातिसार में :– धनियां के कल्क से पाक-विधि से सिद्ध किया हुआ घी सेवन करने से दीपन-पाचन होकर अतिसार मिटता है। – बंगसेन

आमाजीर्ण शूल में :– धनियां और सौंठ से सिद्ध क्वाथ पीने से आमाजीर्ण से होने वाला दर्द मिटता है
-बंगसेन

बच्चों के श्वासकास में :– धनियां के चूर्ण को मिश्री और चावल के धोवन में पिलाने से पित्त से होने वाली खांसी और श्वास मिट जाती है -बंगसेन

पित्तजन्य शोथ (सूजन) में :– सिरके के साथ हरे धनिये के रस को सूजन पर मलने से या पट्टी तर करके रखने से सूजन मिटती है। -ख॰ अ॰

पित्ती उछलने पर :– हरे धनिये का रस मलना लाभदायक है एवं गुलरोगन और शहद के साथ मिलाकर मलना अधिक लाभ करता है। 2 तोला धनिये के रस में शरबत उन्नाब समान भाग मिलाकर पिलाने से पित्ती उछलने से लाभ होता है -ख॰ अ॰

सिर में गर्मी अधिक होने पर :– हरे धनिये को पीसकर कनपट्टी पर लेप करना बहुत लाभदायक है।

नकसीर में :– हरे धनिये का रस नाक में टपकाना लाभदायक है -ख॰ अ॰

नींद लाने के लिए :– हरे धनिये का रस या उसका शरबत पीने से खूब नींद आती है -ख॰ अ॰

आँखों में डीड या मवाद आने पर :– हरे धनिये के पत्तों को पीसकर बांधने से रुक जाती है -ख॰ अ॰

जीभ की सूजन और जलन में :– हरे धनिये के पत्ते चूसने या रस को मुँह में भरकर कुल्ला करने से जीभ की सूजन, छाले मुँह में आना आदि विकार मिट जाते है। -ख॰ अ॰

कामोत्तेजना काम करने के लिए :– धनिये की चटनी अधिक काम-उत्तेजना को कम कर देती है -ख॰ अ॰

बच्चा जल्दी जनने के लिए :– इसके हरे पेड़ (जड़-सहित) को जांघ पर बांधने से बच्चा जल्दी हो जाता है

अत्यार्तव (पीरियड्स अधिक होने) में :– धनिये का रस अधिक मात्रा में सेवन करने से रजःस्त्राव की अधिकता कम हो जाती है -ख॰ अ॰
धनिये के सूखे बीजों को खूब बारीक़ घोट पीसकर घावों पर लेप करने से बहता हुआ खून बंद हो जाता है
-ख॰ अ॰

बवासीर में खून होने पर :– धनिये को दूध और मिश्री के साथ पीने से बवासीर का खून बंद हो जाता है।
-ख॰ अ॰

इसके क्वाथ (काढ़े) से आँख धोने से आँख की रोशनी कभी कम नहीं होती। बहुत दिन की दुखी हुई आँख जो अच्छी नहीं होती हो उसके लिए धनिये का क्वाथ उपयोगी है।

धनिया शराब के नशे और गंध को नष्ट करता है।

जौ के आटे के साथ धनिये की पुल्टिस सूजन (शोथ) पर बाँधी जाती है। -डमिक

धनिये के रस को सूजन के ऊपर मलने से सूजन मिट जाती है और सिर के दर्द में माथे पर मलने से भी दर्द मिट जाता है। – डा॰ सखाराम अर्जुन

इसके हरे पत्तों में शीतलता विशेष रूप से रहती है, जो सूखने पर बिलकुल कम हो जाती है। इसके बीज दिमाग की और जाने वाली गर्मी के परमाणुओं को रोकने वाली होती है यह आमाशय में अधिक समय तक ठहरता है, जिससे भोजन भी वहां ज्यादा देर तक ठहरता है और पाचन होता है जिन लोगों के आमाशय में भोजन कम ठहरता हो। जिसे पाचन न होता हो (बिना पचे ही भोजन निकल जाता हो) धनिये का सेवन बहुत उपयोगी है। -ख॰ अ॰।

Leave a Reply

%d bloggers like this: