रोगों के मूल कारणआयुर्वेद के अनुसार रोगों के मूल कारण दैनिक-चर्या के अन्तर्गत तीन बताये गए है।

  • अतियोग — शक्ति व मर्यादा से अधिक सेवन अतियोग है।
  • मिथ्या योग — गलत ढंग से सेवन मिथ्या योग है।
  • अयोग — बिलकुल ही सेवन न करना अयोग है।

इसमें भोजन की गलतियों का सबसे अधिक महत्व है क्योंकि शरीर में रस, रस से रक्त, रक्त से माँस, माँस से मेद, मेद से हड्डी, हड्डी से मज्जा और मज्जा से वीर्य, ये सभी भोजन से ही बनते है।

वाग्भट्ट के अनुसार गलत विधि से गलत मात्रा में भोजन के सेवन से मंदाग्नि और मंदाग्नि से कब्ज रहने लगता है। तब आंतो में रुका मल सड़कर आँव व दूषित रस बनाने लगता है। इन दूषित रसों को वायु अपने नियम के अनुसार सारे शरीर में पंहुचा देती है और यह दूषित रस ही सभी तरह के रोगों को पैदा करती है।

विहार-सम्बन्धी जानने योग्य बातें

  • उगते सूर्य की गुलाबी किरणें नंगे शरीर पर पड़ने से आरोग्य प्राप्त होता है। निरोगी रहने के लिए धूप का सेवन पीठ पर करना चाहिए।
  • भोजन के बाद 6 घंटे तक सहवास करना हानिकारक होता है।
  • माताओं को स्नान, क्रोध या सहवास के आधे घंटे बाद शांत होकर ही बच्चों को स्तनपान कराना चाहिए, नहीं तो बच्चे बीमार हो जाते है।
    माताओं को लेटे-लेटे, करवट से लेटे बच्चे को स्तन-पान नहीं कराना चाहिए इससे बच्चों के कान बहने के रोग हो जाते है।
  • बच्चों की कमर में करधनी जरूर बाँधनी चाहिए, इससे आंते उतरने की संभावना मिट जाती है।
  • मेहनत का काम करते समय हमेशा कमर कस कर रखनी चाहिए चाहे बेल्ट या किसी कपड़े से, क्योंकि कमर के ना कसने से आंत उतरना या कमर के दर्द की बीमारी होने की सम्भावना रहती है।
  • आँखों को तेज धूप, तेज रोशनी और धुल व धुंए से बचाना बेहद जरूरी है, दिन में तीन-चार बार आँखों को मुँह में पानी भरकर ठन्डे पानी से छींटे देकर धोते रहना चाहिए और रात में कोई सुरमा, काजल आदि डालना चाहिए।

रोगी को कभी भी मिर्च, खट्टे पदार्थ जैसे इमली, आमचूर, कांजी, सिरका, दही, खट्टी छाछ या बासी भोजन, मूली, केला, अरबी, कटहल, ग्वार की फली, जिमीकंद आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

कमर या जोड़ों के दर्द वाले रोगियों को केला, पालक, टमाटर, चावल, दही, मट्ठा आदि खट्टी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • दिन भर केवल सत्तू पर निर्भर रहना भी नुकसानदायक होता है।
  • तुलसी के पत्तियों को कभी-भी दांतो से चबाकर नहीं खाना चाहिए, इसके सेवन की सबसे अच्छी विधि यह है कि 11 से 50 पत्तियां तक 2 काली मिर्च के साथ धोकर, पत्थर पर पीसकर उसमे एक चम्मच दही या शहद मिला कर लेवें।
  • प्यास लगने पर पानी हमेशा घूँट-घूँट कर पीना चाहिए।
  • भोजन में हमेशा मित मात्रा ( ना थोड़ा, ना ज्यादा ) सेंधा नमक उपयोग करना चाहिए क्योकि यह त्रिदोषों को हरने वाला होता है।

आयुर्वेद के अनुसार भोजन से पहले एक घूँट पानी पीना चाहिए। भोजन के बीच में प्यास लगने पर थोड़ा-थोड़ा पानी पी सकते है, परन्तु बाद में कम से कम आधा घंटे तक पानी न पीवें।

  • भोजन के बाद तकर (यानि ताजा दही जो खट्टा न हो उसमे आधा भाग यानि 100 ग्राम में 50 ग्राम पानी मिलाकर अच्छी तरह मथकर) सेवन करना लाभदायक है, यह अनेक रोगों से बचाने वाला होता है।

आयुर्वेद निघण्टु के अनुसार छोटी पतली चूंच वाली मूली चरपरी, गरम और त्रिदोषों को मिटाने वाली होती है। रात में रखी मूली का सेवन सुबह में विशेष लाभदायक होती है, बाद में पानी ना पीवें।

  • मोटी बड़ी मूली त्रिदोषकारक होती है अतः बड़ी मूली को घी या तेल में भूनकर ही खाना चाहिए, ऐसा करने से उसका त्रिदोष पैदा करने वाला दोष नष्ट हो जाता है।
  • खीरा का उपयोग सुबह के समय जलपान के रूप में ही सबसे अच्छा होता है, रात को खीरा खाने से बचें।

आयुर्वेद के अनुसार दही का सीधा सेवन हानिकारक होता है (अर्थात अच्छी तरह मथकर ही दही लेनी चाहिए)।

  • खीरे के साथ कभी-भी ककड़ी नहीं लेनी चाहिए।
  • मूली के साथ गुड़ नुकसानदेह होता है।
  • चावल के साथ सिरका नहीं लेना चाहिए।
  • गरम पानी के साथ शहद नहीं लेना चाहिए और ना ही शहद को गर्म करना चाहिए (निवाये पानी में शहद ले सकते है)
  • शीतल जल के साथ — मूंगफली, घी, तेल, खरबूजा, अमरुद, जामुन, ककड़ी, खीरा, गर्म दूध या गर्म भोजन नहीं लेना चाहिए।
  • खरबूजे के साथ — लहुसन, मूली या उसके पत्ते, दूध या दही नुकसानदायक होते है।
  • तरबूज के साथ — पुदीना या ठंडा पानी नहीं लेना चाहिए।

भोजन के हितकारी संयोग

  • खरबूजे के साथ शक्कर, तरबूज के साथ गुड़, आम के साथ दूध और केले के साथ छोटी इलायची लाभदायक है
  • मुनक्के व अंजीर के साथ दूध और सर्दियों में छुहारों व खजूर के साथ दूध लाभदायक है।
  • इमली के साथ गुड़ और अमरुद के साथ नमक और काली मिर्च और बाद में सौंफ लाभकारी होती है।
  • मकई के साथ छाछ, चावल के साथ दही और उसके बाद नारियल की गिरी का टुकड़ा लाभकारी होता है।
  • मूली के साथ मूली के पत्ते, कटहल के बाद केला, बथुआ के साथ दही मिलाकर रायता और गाजर के साथ मेथी मिला साग लाभकारी होते है।

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