सौंफपरिचय :–
सौंफ के क्षुप (छोटी तथा घनी डालियों वाले वृक्षों का एक प्रकार या वर्ग। झाड़ी) लम्बे सोआ के समान और पत्ते भी उसी के समान, फूल छाता के आकार में थोड़े पीले रंग के होते है। फल किंचित अंडाकार होते है। नए बीज हरे रंग के और पुराने होने पर पीलापनयुक्त हो जाते है। सौंफ का बीज जीरे से बड़ा एक विशिष्ट तरह की सुगंध से युक्त स्वाद में मीठा और रोचक होता है। भोजन के बाद इसे मुखशुद्धी और पाचन के लिए खाया जाता है। इसकी खेती आमतौर पर सभी राज्यों में की जाती है। विशेषतः उतर प्रदेश में इसकी खेती की जाती है। खेती के सिवाय जंगली भी पैदा हो जाती है।

 

ग्राह्य अंग :–     इसके बीज ही ग्राह्य है पर इसके पत्ते और क्षुप भी हरी अवस्था में काम में लाया जाता है।

मात्रा :–
1 माशा से 3 माशा तक है। आवश्यकता पड़ने पर अधिक भी उपयोग में आती है।

सौंफ के नाम :–
संस्कृत – मिश्रेया, मधुरिका। हिंदी – सौंफ। बांग्ला – मौरी, मीठाजीरा। मराठी – बड़ी सौंफ, बड़ी शोफ, बड़ी सोंप। गुजराती – बरियाली, बारिअरी। कर्नाटकी – सोयु, कासँ, छसीगे। तमिल – सोहिकीरे, सोम्बु। फ़ारसी – राजयानेज, राजयाना, बादियाँ। अरबी – एजियानेज असलुल एजियनज़ राजियाज। अंग्रेजी – Fennel Seeds। लैटिन – Faeniculum Vulgare ।

सौंफ के गुण :–

दिल की बिमारियों में लाभकारी, मल की विबद्धत्ता को दूर करने वाली, कृमि-शूलनाशक, रुक्ष, उष्ण वीर्य (गरम प्रकृति वाला), पाचक, कास (खांसी), वमन (उल्टी), कफ और वायु को दूर करने वाली होती है। विशेषतः योनि-सम्बन्धी दर्द और मंदाग्नि नाशक होती है।

अन्य आचार्यों का विचार :–

आत्रेय संहिता के अनुसार यह त्रिदोषनाशक, मेधाजनक (बुद्धि बढ़ाने वाली), पथ्य (खाने लायक), रूचि पैदा करने वाली है।

वैद्यक निघण्टु के अनुसार सौंफ पाक में चरपरी, गर्भदायक, सारक, कड़वी, मधुर, वीर्यजनक, हाजमा तेज करने वाली, वातज्वर, शूल (दर्द), दाह (जलन), आँख के रोग, तृषा (प्यास), वरण (घाव), अतिसार (बार-बार पतले दस्त होना) और आमनाशक है।

राजनिघण्टु के अनुसार यह स्निग्ध, कफनाशक और प्लीहावृद्धि नाशक है।

यह दाह और रक्तपित्त नाशक भी है।

विकारतिमिरभास्कर के अनुसार इसका अर्क शीतल, रुचिकारक, चरपरा, हाजमा तेज करने वाला, अन्नपाचक, मीठा, तृष्णा (प्यास), वमन, पित्त और दाहनाशक है।

यूनानीमतानुसार गुण :–

सौंफ दूसरे दर्जे में गर्म और खुश्क, गर्म प्रकृति वालों को नुकसानदायक है।

दर्पनाशक – चन्दन चूरा और शिकंजी है। इसका प्रतिनिधि (विकल्प) करफ्स के बीज है।

सौंफ यकृत (liver), प्लीहा (spleen), वृक्क (kidney) और मूत्राशय के दोषों को बाहर निकालती, पेट के दर्द को शांति पहुंचाती है। आँखों की रोशनी एवं आमाशय को बलदायक, वातानुलोमक, कफस्त्रावक, अतिसार, कास नाशक (खांसी को नष्ट करने वाली) और दुग्ध बढ़ाने वाली है।

इसकी जड़ शोथ (सूजन) को नष्ट करने वाली, वातानुलोमक (गैस को ख़त्म करने वाली), पाचक, पेशाब लाने वाली, मासिक-धर्म लाने वाली, दर्द ख़त्म करने वाली और रीढ़ के दर्द को दूर करती है।

उपयोग :– सौंफ का उपयोग चूर्ण, आसव, अरिष्टों, क्वाथ (काढ़ा), वटी और पाक में सब तरह से होता है। इसके अर्क का उपयोग भी पाया जाता है। नीचे कुछ गुणकारी उपयोग लिखते है।

आँख :- सौंफ के हरे पेड़ को कुचलकर उसका रस निचोड़कर उसमे सुरमे को घोट कर आँखों में लगाना लाभदायक है। एवं बंद बर्तन में सौंफ की राख करके उसे आँख में लगाने से आँखों की रोशनी बढ़ जाती है।

बच्चों की आँख में मवाद (डीड) आने पर इस के पेड़ के रस को सुखाकर उसमे शहद मिलाकर लगाने से लाभ होता है। आँख में पानी या डीड आना बंद हो जाता है।

पुराने बुखार में :–   शिकँजबीन के साथ इस का चूर्ण सेवन करना पुराने बुखार में लाभदायक है।

बच्चो के पेट दर्द में :–   इसे बारीक़ पीसकर बच्चों के पेट पर लेप करने से पेट का दर्द दूर हो जाता है।

बिच्छू काटे पर :–   शराब में उबालकर या पीसकर डंक के स्थान पर रखना लाभदायक है।

मलेरिया बुखार में उल्टियां आने पर :–    सौंफ का चूर्ण ठन्डे जल के साथ फाँकना उल्टियों को, जी मिचलाने को रोकता है।

आमातिसार में :–    सौंफ को घी में तलकर मिश्री मिलाकर फाँकने से दस्त रुक जाया करते है।

पेशाब लाने के लिए :–    पत्तों का स्वरस पीने से पेशाब बहुत आता है।

वातानुलोमन (गैस) के लिए :–    बच्चो को सौंफ का काढ़ा पिलाने से पेट के विकारो को दूर कर दस्त ठीक लाता है और अपान वायु निकालता है।

अति सेवन :–

इसका अति सेवन गर्म स्वभाव वाले व्यक्ति के लिए हानिकारक है, उनके सिर में दर्द उत्पन्न हो जाता है। इसके विकारों को ख़त्म करने के लिए चन्दन चूरा और कपूर दिया जाता है ।

भोजन के बाद सौंफ चबाने से मुख शुद्ध होकर सुगन्धित हो जाता है। आहार-परिपाक के लिए पाचक रस अच्छी तरह बनता है।

नोट :– दर्पनाशक का अर्थ औषधि के लेने से उत्पन्न हुए विकार को नष्ट करने वाले द्रव्य से है।
नोट:- उपयोग से पहले चिकित्सक से परामर्श लें।                                                                                                                                                                     —- ख॰ अ॰

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