दही का सेवन इन महीनो में न करें — नहीं तो हो जाओगे बीमार

दूध में दही का जामन देकर रख देने से दही के जीवाणु बड़ी तेजी से बढ़कर दूध को 8-10 घंटे में ही दही बना देते है ताजा दही ही विशेष रूप से जीवनदायिनी शक्तिवर्धक होती है। रखा रहने पर धीरे-धीरे इसकी जीवन-शक्ति घटती है और वह खट्टा हो जाता है। आयुर्वेदिक ग्रन्थ “भाव-प्रकाश एवं सुशुरुत […]

दूध नहीं पचता है तो ऐसे बनाये दूध का विकल्प

आयुर्वेद के अनुसार माँ के दूध के बाद मानव के लिए गाय का दूध, बकरी या भैंस के दूध से अच्छा होता है। सुबह के समय दुहा हुआ दोषयुक्त होता है और शाम को दुहा हुआ दोषों से रहित होता है। इसलिए शाम के समय गाय का दूध दुहने के तुरंत बाद, पाव भर तक […]

तेल मालिश के द्वारा स्वास्थ्य प्राप्ति

मालिश का जो महत्व आयुर्वेद में बताया गया है उतना किसी दूसरी पैथी में नहीं मिलता है। मालिश दो तरह की होती है :  सुखी मालिश तैलों के द्वारा मालिश आयुर्वेद के अनुसार तेल मालिश बुढ़ापे व रोगों को हटाकर दीर्घायु, त्वचा को कोमलता, सुंदरता, अंगो को लचक व दृढ़ता और शक्ति देती है। तेल […]

भोजन ऐसे होता है – रोगों का मूल कारण

आयुर्वेद के अनुसार रोगों के मूल कारण दैनिक-चर्या के अन्तर्गत तीन बताये गए है। अतियोग — शक्ति व मर्यादा से अधिक सेवन अतियोग है। मिथ्या योग — गलत ढंग से सेवन मिथ्या योग है। अयोग — बिलकुल ही सेवन न करना अयोग है। इसमें भोजन की गलतियों का सबसे अधिक महत्व है क्योंकि शरीर में […]

सौंफ – आँखों की रोशनी बढ़ाने के साथ और भी कई रोगों का है काल

परिचय :– सौंफ के क्षुप (छोटी तथा घनी डालियों वाले वृक्षों का एक प्रकार या वर्ग। झाड़ी) लम्बे सोआ के समान और पत्ते भी उसी के समान, फूल छाता के आकार में थोड़े पीले रंग के होते है। फल किंचित अंडाकार होते है। नए बीज हरे रंग के और पुराने होने पर पीलापनयुक्त हो जाते […]

धनियां – छोटे से पौधे के इन फायदों को जानकर हो जाओगे हैरान

परिचय : – धनियां – इसका पौधा एक या दो फुट ऊँचा, शाखायें चिकनी, पत्ते विषमवर्ती जड़ के समीपवाले, गोलाकार 3-4 या 5 भागों में बँटे हुए, प्रत्येक भाग कटे हुए किनारेवाले होते है। फूल छत्ते से सोया के फूल के समान सफ़ेद या कभी-कभी गुलाबी झलक युक्त होते है। फल छोटे-छोटे अंडाकार गुच्छों में […]

आहार के इन नियमों को अपनाकर सदा बने रहेंगे निरोगी

आहार-विहार-सम्बन्धी सूचना :– ठंडा पानी पीना :–  मूर्च्छा (बेहोशी), पित्त, गर्मी दाह (जलन), विष-विकार, रक्तविकार, नशा होने पर, मेहनत, तमक-श्वास, वमन (उल्टी) और उर्ध्व रक्तपित्त आदि रोगों में आहार के पच जाने पर ठंडा जल पिलाना लाभदायक है। रक्तपित्त, मूर्च्छा, रक्तविकार और पित्त प्रधान रोगों में गर्म (निवाये) पानी का उपयोग हानिकारक है॥ नोट :- […]

हरड़ – अकेली ही कर देती है कई बीमारियों का जड़ से सफाया

हरड़ :– जब देवराज इन्दर ने अमृत पिया तब उसमे से एक बूँद धरती पर गिर पड़ी, उसमें से सात तरह की हरड़ उत्पन्न हुई है। हरड़ के नाम :– हरीतकी, अभया, पथ्या, कायस्था, पूतना, अमृता, हेमवती, अव्यथा, चेतकी, श्रेयषी, शिवा, वयस्था, विजया, जीवन्ती, रोहिणी। हरड़ के अनेक भाषाओ के नाम :– संस्कृत — हरीतकी। […]

बसंत ऋतु के नियम (what to eat in spring)

बसंत ऋतु के नियम :- 1. वमनकारक औषधियों द्वारा वमन करना, 2. नाक में औषध डालकर छींक लेना 3. शहद के साथ हरड़ों का सेवन 4. व्यायाम करना 5. चूर्ण के साथ शरीर का मर्दन करना 6. कफनाशक कुल्ले करना 7. लोहे की सलाई पर सिका हुआ जंगली जीवों का मास खाना ( मासाहारी के […]

गर्मी (ग्रीष्म ऋतु) के नियम – what to eat in summer

ग्रीष्म ऋतु के नियम :– मधुर, शीतल, चिकने, हलके, पतले पदार्थ (रसाला – सिकरन), शक्कर, सत्तू, दूध, जंगल के जीवो का मांस, शक्कर के साथ चावल, लौकी (घीया), भात और मांसरस खाना, चन्द्रमा की किरणों का सेवन, दिन में सोना, चन्दन लगाना, शीतल जल, पानक (शरबत का पीना) गर्मी के मौसम में लाभदायक है। परहेज […]