जड़ी-बूटी ऐसी वनस्पतियों को कहते है जो स्वास्थ्य और चिकित्सा के लिए उपयोगी हो या सुगंध इत्यादि प्रदान करती हो जड़ी-बूटी का विशेष महत्व उनके औषधि गुणधर्म के कारण होती है वर्षो से इनका इस्तेमाल औषधि रूप में किया जा रहा है लेकिन वर्तमान में इस परंपरा में बहुत बदलाव आ चूका है विकास के नाम पर जंगलो को ख़त्म किया जा रहा है जड़ी-बूटी भारत की परंपरागत चिकित्सा पद्धति रही है चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में जड़ी-बूटियों के बारे में विस्तृत रूप से बताया गया है इस पद्धति में पौधों के पंचांग (फल, फूल, पत्ते, छाल और जड़) और उनके रस आदि का उपयोग रोगों के उपचार के लिए किया जाता है पहले ज़माने में वैद्य जड़ी बूटी को पहचानते थे स्वयं जंगलों में जाकर लेकर आते थे परन्तु आज के समय में तो इतना बुरा हाल है की जड़ी बूटियों को हम घास समझ कर या तो उखाड़ देते है या उन पर तरह-तरह के पेस्टीसाइड डलवा कर नष्ट कर देते है
भारत वर्ष में वनौषधि पर्याप्त और स्वत ही उग जाती है परन्तु आज हम उनके नाम तक नहीं जानते क्योंकि हमें संस्कृत नहीं आती जितने भी हमारे प्राचीन ग्रन्थ है वो सब संस्कृत में है कई विद्वानों ने उनको अलग-अलग भाषा में प्रकाशित किया पर बहुत काम ऐसी पुस्तक मिलेगी जिसमे जड़ी-बूटियों को रंगीन चित्रों सहित प्रकाशित किया गया हो
मेरी यहाँ इस साइट के माध्यम से यही कोशिश रहेगी आप सभी पाठको तक में जड़ी-बूटी की सटीक जानकारी रंगीन चित्रों, अन्य नाम के साथ उपलब्ध करवा सकूँ

सौंफ – आँखों की रोशनी बढ़ाने के साथ और भी कई रोगों का है काल

परिचय :– सौंफ के क्षुप (छोटी तथा घनी डालियों वाले वृक्षों का एक प्रकार या वर्ग। झाड़ी) लम्बे सोआ के समान और पत्ते भी उसी के समान, फूल छाता के आकार में थोड़े पीले रंग के होते है। फल किंचित अंडाकार होते है। नए बीज हरे रंग के और पुराने ...
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धनियां – छोटे से पौधे के इन फायदों को जानकर हो जाओगे हैरान

परिचय : – धनियां – इसका पौधा एक या दो फुट ऊँचा, शाखायें चिकनी, पत्ते विषमवर्ती जड़ के समीपवाले, गोलाकार 3-4 या 5 भागों में बँटे हुए, प्रत्येक भाग कटे हुए किनारेवाले होते है। फूल छत्ते से सोया के फूल के समान सफ़ेद या कभी-कभी गुलाबी झलक युक्त होते है। ...
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हरड़ – अकेली ही कर देती है कई बीमारियों का जड़ से सफाया

हरड़ :– जब देवराज इन्दर ने अमृत पिया तब उसमे से एक बूँद धरती पर गिर पड़ी, उसमें से सात तरह की हरड़ उत्पन्न हुई है। हरड़ के नाम :– हरीतकी, अभया, पथ्या, कायस्था, पूतना, अमृता, हेमवती, अव्यथा, चेतकी, श्रेयषी, शिवा, वयस्था, विजया, जीवन्ती, रोहिणी। हरड़ के अनेक भाषाओ के ...
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