हज़ारो वर्ष पहले ही हमारे पूर्वज उत्तम और सद्गुणी संतान पैदा करने की प्रक्रिया यथार्थ रूप से लिख गए थे परन्तु अफ़सोस की बात है आज के समय में हम लोगों का ध्यान उस और नहीं जाता मनुष्य जैसी चाहे वैसी संतान उत्पन्न कर सकते है परन्तु बड़े खेद की बात है की अपने देश में विद्या के अभाव में यह बात ईश्वर की मर्जी पर छोड़ दी गयी है जो कार्य मनुष्य के करने का है उसको ईश्वर के भरोसे छोड़ना मुर्ख मनुष्य का काम नहीं तो और क्या है मेरे अनुभव में कुछ लोग ऐसे भी आये है जिनको मैंने ये युक्तियाँ जो की आयुर्वेद में लिखित है बताई तो उन लोगों का तर्क होता है जी हमने तो ये सब किया जो आपने बताया पर कुछ नहीं हुआ परन्तु उनसे बात करने पर पता चला की उन युक्तियों की कुछ छोटी-छोटी बातों को अनदेखा कर दिया जिससे उनको पूरा फायदा नहीं मिल पाया लेकिन फिर भी उन्होंने सारा दोष उन युक्तियों में निकाल दिया जिन कार्यो को मनुष्य जाति स्वयं कर सकती है उसको ईश्वर पर छोड़ना गलत है बल्कि ये कह सकते है ईश्वर की आज्ञा और नियमों का उल्लंघन करना भी है उत्तम संतान उत्पन्न करना मनुष्य की भलाई के लिए ही है
मैं ये नहीं कहता इस समय जो संतान की उत्पति है वो ईश्वर के नियमो के विरुद्ध है यह सब नियमानुकूल है लेकिन उत्तम, गुणवान और वीर संतान उत्पन्न करने के जो कायदे आयुर्वेद में पाए जाते है उनके अनुसार संतान उत्पन करने के तरीके से आजकल के मनुष्य बिलकुल अनभिज्ञ है
उत्तम संतान होने से ही भारत एकता के धागे में बद्ध हो सकता है

जय हिन्द

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