बीमार होने का सबसे बड़ा कारण भोजन की अव्यस्था है प्राकर्तिक भोजन को छोड़ कर हम लोग अनेक तरह के गरिष्ठ और ना खाने लायक वस्तु को भी खाने लगे है सबसे ज्यादा असर तो हम लोगों पर पश्चिम सभ्यता का हुआ है हम लोग इस बात पर ध्यान ही नहीं देते की उन पश्चिम देशों की जलवायु हमारे यहाँ की जलवायु से बिलकुल अलग है वहां पर वर्ष के ज्यादातर महीनो में सर्दी होती है और उन लोगों के लिए चाय, बर्गर इत्यादि गरिष्ठ भोजन ठीक है आयुर्वेद में भी ये बात लिखी हुई है कि सर्दी में गरिष्ठ भोजन करे परन्तु हम पश्चिम सभ्यता कि तरह ज्यादातर महीनो में ये सब नहीं खा सकते
अगर हम ऐसा करते भी है तो हम साध्य और दुसाध्य रोगों के ऐसे जाल में फस जाते है जिससे निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है खाने का समय भी कुछ निश्चित नहीं है दिन-रात जब दिल किया तभी खा लिया इतने खाने से जितने भारतवासी मर रहे है उतने तो शायद अकाल भी आ जाये तब भी ना मरे
हम स्वस्थ्य की छोटी-छोटी बातों पर भी तो ध्यान नहीं देते जब तक ऐसे कारण मौजूद है तब तक हम स्वस्थ कैसे रह सकते है
सदा सात्विक भोजन करना और स्वच्छ जल पीना होगा, स्वच्छ वायु सेवन करनी होगी, विचार पवित्र रखने होंगे कपडे और शरीर की सफाई का पूरा ध्यान रखना होगा तभी हम स्वस्थ रहकर पूर्ण आयु का भोग कर सकेंगे हम कम से कम १०० वर्ष तक जीवित रह सकेंगे

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