आजकल एलोपैथी चिकित्सा में डॉक्टर इतनी अधिक और तेज दवाईयाँ देते है की बीमार व्यक्ति का शरीर भी अनेक तरह के रोगों से भर जाता है इस तरह उन दवाइयों से वो रोग तो दब जाता है परन्तु जड़ से नहीं जाता थोड़े समय बाद फिर से उभर आता है उदाहरण के लिए कब्ज मे एलोपैथी चिकित्सा मे जुलाब की गोली दी जाती है लेकिन ये भी सत्य है की उस दिन तो जुलाब आने से पेट साफ़ हो जायेगा किन्तु फिर उसके २-३ दिन बाद तक व्यक्ति को कब्ज ज्यादा हो जाती है परन्तु आयुर्वेद में ऐसा नहीं है स्पष्ट शब्दो मै कहुँ तो मुझे लगता है एलोपैथी चिकित्सा पद्धति बीमार व्यक्ति को निरोग करने की बजाय और ज्यादा रोगी बना देती है
आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है जिसे पंचमहाभूत भी कहा जाता है और इन पंचतत्वों से तीन दोष उत्पन्न हुए जिसे हम वात, पित्त और कफ के नाम से जानते है अगर इन दोष मे से एक भी असंतुलित हुआ तो शरीर में कोई ना कोई रोग उभर आता है
घरेलु उपचार ऐसे उपचार है जो आसानी से घर में आसानी से उपलब्ध वस्तुओं से तैयार होते है ये वस्तुंए घर या हमारे आस-पास आसानी से उपलब्ध होती है इनका प्रयोग और तैयार करना बहुत सरल है किसी विशेषज्ञ कि जरूरत नहीं होती है ये रोगों में प्रभावी रूप से काम करते है इनका दुष्प्रभाव होता नहीं है अगर हो भी तो बहुत ही हल्का होता है सामान्यता इनमे कोई भी ऐसा रसायन नहीं होता जोकि मानव शरीर के लिए हानिकारक होते है

दही का सेवन इन महीनो में न करें — नहीं तो हो जाओगे बीमार

दूध में दही का जामन देकर रख देने से दही के जीवाणु बड़ी तेजी से बढ़कर दूध को 8-10 घंटे में ही दही बना देते है ताजा दही ही विशेष रूप से जीवनदायिनी शक्तिवर्धक होती है। रखा रहने पर धीरे-धीरे इसकी जीवन-शक्ति घटती है और वह खट्टा हो जाता है। ...
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दूध नहीं पचता है तो ऐसे बनाये दूध का विकल्प

आयुर्वेद के अनुसार माँ के दूध के बाद मानव के लिए गाय का दूध, बकरी या भैंस के दूध से अच्छा होता है। सुबह के समय दुहा हुआ दोषयुक्त होता है और शाम को दुहा हुआ दोषों से रहित होता है। इसलिए शाम के समय गाय का दूध दुहने के ...
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तेल मालिश के द्वारा स्वास्थ्य प्राप्ति

मालिश का जो महत्व आयुर्वेद में बताया गया है उतना किसी दूसरी पैथी में नहीं मिलता है। मालिश दो तरह की होती है : सुखी मालिश तैलों के द्वारा मालिश आयुर्वेद के अनुसार तेल मालिश बुढ़ापे व रोगों को हटाकर दीर्घायु, त्वचा को कोमलता, सुंदरता, अंगो को लचक व दृढ़ता ...
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भोजन ऐसे होता है – रोगों का मूल कारण

आयुर्वेद के अनुसार रोगों के मूल कारण दैनिक-चर्या के अन्तर्गत तीन बताये गए है। अतियोग — शक्ति व मर्यादा से अधिक सेवन अतियोग है। मिथ्या योग — गलत ढंग से सेवन मिथ्या योग है। अयोग — बिलकुल ही सेवन न करना अयोग है। इसमें भोजन की गलतियों का सबसे अधिक ...
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गर्मी (ग्रीष्म ऋतु) के नियम – what to eat in summer

ग्रीष्म ऋतु के नियम :– मधुर, शीतल, चिकने, हलके, पतले पदार्थ (रसाला – सिकरन), शक्कर, सत्तू, दूध, जंगल के जीवो का मांस, शक्कर के साथ चावल, लौकी (घीया), भात और मांसरस खाना, चन्द्रमा की किरणों का सेवन, दिन में सोना, चन्दन लगाना, शीतल जल, पानक (शरबत का पीना) गर्मी के ...
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उषापान – Drink water in Morning

उषाकाल में जलपान के गुण :- जो व्यक्ति हर दिन सूर्योदय के समय उषापान यानी आठ अंजली बासी पानी पीता है वह रोग और बुढ़ापे के विकार से मुक्त होकर सौ वर्ष तक जीवित रहता है जल पीने का समय :- जल पीने का समय रात का चौथा पहर ही ...
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उच्च रक्तचाप (High blood pressure) को कैसे नियंत्रित करें

परिचय :- रक्त भार मापने पर जब 150 से 300 तक उच्च रक्तचाप बढ़ जाता है तब अनेक विकार शरीर में पैदा हो जाते है जो B.P. के सामान्य होते ही अपने आप ही सामान्य हो जाते है रक्तचाप का बढ़ना अपने आप में कोई स्वतंत्र रोग नहीं है बल्कि ...
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मलेरिया (malaria) के लक्षण और बचने के घरेलु उपाय

मलेरिया बुखार एक प्रकार का संक्रामक रोग है जो मच्छर के काटने से होता है आयुर्वेद में इसे विषम शीतजवर कहते है एलोपैथी चिकित्सा में इसे इंटरमिटेंट फीवर, मार्श फीवर भी कहते है आमजन इसे जुडी बुखार या जाड़े का बुखार भी कहते है यह बुखार ज्यादा वहीँ होता है ...
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